हेलो फ्रेंड्स एकबार फिर मेरे blog पर आपका स्वागत हे. आज हम बात करेंगे उज्जैन मे स्थित कालभैरव मंदिर के बारेमे. वैसे तो कालभैरव मंदिर का ज़िकर पुरानो मे भी दिखाया गया है.
कालभैरव मंदिर उज्जैन से करीब 6 किलोमीटर की दुरी पर है. यह मंदिर शहर से काफ़ी पास है इस लिए यहां पर जाने के लिए आपको बस, टैक्सी, बाइक, कार सबकुछ आसानीसे मिल जाता है.
कालभैरव का मंदिर थोड़ी ऊचाई वाली जगह पर स्थित है.
कालभैरव मंदिर का गेट बहुत ही बड़ा और पुराना है. दरवाजे की ऊचाई करीबन दो या तीन मंजिल जीतनी होंगी. दरवाजे पर बारीकी से नक्शी काम किया गया नज़र आता है. दरवाजे के अंदर जाने पर दोनों तरफ प्रसाद की लंबी दुकाने नज़र आने लगती है. आमतौर पर मंदिर मे प्रशाद के रुपमे हम श्रीफल, अगरबत्ती, या फिर कुछ मीठा अर्पण करते है. लेकिन यहां पर इन सब चीज़ो के अलावा देशी शराब की छोटी बोतले अर्पण की जाती है.
मंदिर में जैसे ही शराब से भरे प्याले काल भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते है देखते ही देखते शराब के प्याले खाली हो जाते है. कहा जाता है कि बहुत साल पहले एक अंग्रेज अधिकारी द्वारा इस बात की गहन तहकीकात करवाई गई कि आखिर शराब जाती कहां है. उसने प्रतिमा के आसपास काफी गहराई तक खुदाई करवाई लेकिन जब नतीजा कुछ भी नहीं निकला तो वो अंग्रेज भी काल भैरव का भक्त बन गया.
कहते हैं प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिको ही आते थे. यहां आकर उनके द्वारा तंत्र क्रियाएं की जाती थी. बाद में ये मंदिर आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया. और फिर यहां भीड़ जुटनी शरू हो गई. कुछ साल पहले यहां बलि प्रथा ख़त्म की गई है. अब भगवान भैरव को केवल मदिरा का भोग लगाया जाता है. यूं तो काल भैरव को मदिरा पिलाने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है लेकिन यह कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, इसे कोई नहीं जान पाया.
मंदिर का जीर्णोद्धार परमार वंश के राजाओं ने करवाया था. मंदिर के पुजारी के अनुसार स्कंद पुराण में काल भैरव के जगह के धार्मिक महत्व का जिक्र किया गया है. कहते हैं चारों वेदों के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना करने का फैसला किया तो देवता भगवान शिव की शरण में गए ताकि अब पांचवा वेद न रचा जा सके. लेकिन फिर भी ब्रह्मा जी ने किसी की बात नहीं मानी. इस पर शिवजी को गुस्सा आया और उन्होंने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को प्रकट किया.
फिर उग्र स्वभाव के इस बालक ने क्रोध में आकर ब्रह्मा जी का पांचवां मस्तक काट दिया. लेकिन बाद में ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के भैरव कई स्थानों पर गए, लेकिन उन्हें मुक्ति कोई नहीं मिली. अंत में भैरव को वापस भगवान शिव के पास जाना पड़ा. शिव ने भैरव को बताया कि वो उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करें. तब जाकर उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी. उसी समय से यहां काल भैरव की पूजा हो रही है. बाद में इस जगह पर एक बड़ा मंदिर बनवाया गया.
Address : Jail Road, Bhairav Garh, Ujjain, Madhya Pradesh 456003
Phone : 096116 64411
District :Ujjain
Deity : Kal Bhairav
कालभैरव मंदिर उज्जैन से करीब 6 किलोमीटर की दुरी पर है. यह मंदिर शहर से काफ़ी पास है इस लिए यहां पर जाने के लिए आपको बस, टैक्सी, बाइक, कार सबकुछ आसानीसे मिल जाता है.
कालभैरव का मंदिर थोड़ी ऊचाई वाली जगह पर स्थित है.
कालभैरव मंदिर का गेट बहुत ही बड़ा और पुराना है. दरवाजे की ऊचाई करीबन दो या तीन मंजिल जीतनी होंगी. दरवाजे पर बारीकी से नक्शी काम किया गया नज़र आता है. दरवाजे के अंदर जाने पर दोनों तरफ प्रसाद की लंबी दुकाने नज़र आने लगती है. आमतौर पर मंदिर मे प्रशाद के रुपमे हम श्रीफल, अगरबत्ती, या फिर कुछ मीठा अर्पण करते है. लेकिन यहां पर इन सब चीज़ो के अलावा देशी शराब की छोटी बोतले अर्पण की जाती है.
मंदिर में जैसे ही शराब से भरे प्याले काल भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते है देखते ही देखते शराब के प्याले खाली हो जाते है. कहा जाता है कि बहुत साल पहले एक अंग्रेज अधिकारी द्वारा इस बात की गहन तहकीकात करवाई गई कि आखिर शराब जाती कहां है. उसने प्रतिमा के आसपास काफी गहराई तक खुदाई करवाई लेकिन जब नतीजा कुछ भी नहीं निकला तो वो अंग्रेज भी काल भैरव का भक्त बन गया.
कहते हैं प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिको ही आते थे. यहां आकर उनके द्वारा तंत्र क्रियाएं की जाती थी. बाद में ये मंदिर आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया. और फिर यहां भीड़ जुटनी शरू हो गई. कुछ साल पहले यहां बलि प्रथा ख़त्म की गई है. अब भगवान भैरव को केवल मदिरा का भोग लगाया जाता है. यूं तो काल भैरव को मदिरा पिलाने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है लेकिन यह कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, इसे कोई नहीं जान पाया.
मंदिर का जीर्णोद्धार परमार वंश के राजाओं ने करवाया था. मंदिर के पुजारी के अनुसार स्कंद पुराण में काल भैरव के जगह के धार्मिक महत्व का जिक्र किया गया है. कहते हैं चारों वेदों के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना करने का फैसला किया तो देवता भगवान शिव की शरण में गए ताकि अब पांचवा वेद न रचा जा सके. लेकिन फिर भी ब्रह्मा जी ने किसी की बात नहीं मानी. इस पर शिवजी को गुस्सा आया और उन्होंने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को प्रकट किया.
फिर उग्र स्वभाव के इस बालक ने क्रोध में आकर ब्रह्मा जी का पांचवां मस्तक काट दिया. लेकिन बाद में ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के भैरव कई स्थानों पर गए, लेकिन उन्हें मुक्ति कोई नहीं मिली. अंत में भैरव को वापस भगवान शिव के पास जाना पड़ा. शिव ने भैरव को बताया कि वो उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करें. तब जाकर उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी. उसी समय से यहां काल भैरव की पूजा हो रही है. बाद में इस जगह पर एक बड़ा मंदिर बनवाया गया.
Address : Jail Road, Bhairav Garh, Ujjain, Madhya Pradesh 456003
Phone : 096116 64411
District :Ujjain
Deity : Kal Bhairav


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