हाई दोस्तों नमस्ते आज हम बात करेंगे उस जगह की जो प्राचीन महानगरों मेंसे एक हे.
=> धोलावीरा
गुजरात के कच्छ में धोलावीरा गांव के पास पांच हजार साल पहले विश्व का प्राचीन महानगर था . इस जगह का खनन पुरातत्त्व विभाग के डॉ॰ आर. एस. बिस्त ने किया था .
जिश लोगो फो पुरातत्वमे दिलचछ्पी है उन लोगो को वहा पर झरुर जाना चाहीये. धोलावीरा करीब १०० हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ हे .धोलावीरा मे आज के आधुनिक महानगरों जैसी पक्की गटर व्यवस्था पांच हजार साल पहले थी. इस प्राचीन महानगर में पानी की जो व्यवस्था की गई थी वह अद्दभुत है.
माना जाता है कि धोलावीरा उस समय मे व्यापार का बइोत बडा केन्दर था. आपको इस लिए यहाँ पर आपको दो कक्षा की श्रेणी वाले मकान दिखेगे उच्च श्रेणी वाले माकन पक्के ईटो वाले हे. माना जाता हे की यहाँ पर बारिस काफी कम हुवा करती होगी . इसलिए यहा पर आपको पानी के काफी बड़े बड़े कुए और जिल के अवसेस आज भी आपको दिखाई देंगे .धोलावीरा में आज भी उस जमाने की प्राचीन व्यापारी भाषा और sinebord आपको देखने मिलिंगे . सुरक्षित किले के एक महाद्वार के ऊपर उस जमाने का साईन बोर्ड पाया गया है. जिस पर दस बड़े-बड़े अक्षरो में कुछ लिखा है. जो पांच हजार साल के बाद आज भी सुरक्षित है. वह महानगर का नाम है अथवा प्रान्त अधिकारियों का नाम, यह आज भी एक रहस्य है. ऐसा लगता है जैसे नगरजनो का स्वागत हो रहा हों सिन्धु घाटी की लिपि आज भी एक
अनसुलझी पहेली है.
हवाई जहाज भुज हवाई अड्डे पर उतर सकते हैं. जहां से ३०० किलोम़ीटर क़ी दूरी पर धोलावीरा स्थित है.ट्रेन से अहमदाबाद वीरमगाम से आगे सामखियारी पर उतरें. वहां से १६० किलोम़ीटर क़ी दूरी पर धोलावीरा स्थित है. सड़क मार्ग से अहमदाबाद या पालनपुर से रापर या भचाउ होकर धोलावीरा आ सकते हैं.
=> धोलावीरा
गुजरात के कच्छ में धोलावीरा गांव के पास पांच हजार साल पहले विश्व का प्राचीन महानगर था . इस जगह का खनन पुरातत्त्व विभाग के डॉ॰ आर. एस. बिस्त ने किया था .
जिश लोगो फो पुरातत्वमे दिलचछ्पी है उन लोगो को वहा पर झरुर जाना चाहीये. धोलावीरा करीब १०० हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ हे .धोलावीरा मे आज के आधुनिक महानगरों जैसी पक्की गटर व्यवस्था पांच हजार साल पहले थी. इस प्राचीन महानगर में पानी की जो व्यवस्था की गई थी वह अद्दभुत है.
माना जाता है कि धोलावीरा उस समय मे व्यापार का बइोत बडा केन्दर था. आपको इस लिए यहाँ पर आपको दो कक्षा की श्रेणी वाले मकान दिखेगे उच्च श्रेणी वाले माकन पक्के ईटो वाले हे. माना जाता हे की यहाँ पर बारिस काफी कम हुवा करती होगी . इसलिए यहा पर आपको पानी के काफी बड़े बड़े कुए और जिल के अवसेस आज भी आपको दिखाई देंगे .धोलावीरा में आज भी उस जमाने की प्राचीन व्यापारी भाषा और sinebord आपको देखने मिलिंगे . सुरक्षित किले के एक महाद्वार के ऊपर उस जमाने का साईन बोर्ड पाया गया है. जिस पर दस बड़े-बड़े अक्षरो में कुछ लिखा है. जो पांच हजार साल के बाद आज भी सुरक्षित है. वह महानगर का नाम है अथवा प्रान्त अधिकारियों का नाम, यह आज भी एक रहस्य है. ऐसा लगता है जैसे नगरजनो का स्वागत हो रहा हों सिन्धु घाटी की लिपि आज भी एक
अनसुलझी पहेली है.
हवाई जहाज भुज हवाई अड्डे पर उतर सकते हैं. जहां से ३०० किलोम़ीटर क़ी दूरी पर धोलावीरा स्थित है.ट्रेन से अहमदाबाद वीरमगाम से आगे सामखियारी पर उतरें. वहां से १६० किलोम़ीटर क़ी दूरी पर धोलावीरा स्थित है. सड़क मार्ग से अहमदाबाद या पालनपुर से रापर या भचाउ होकर धोलावीरा आ सकते हैं.


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